टिमटिमाते सपने

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पुहोर ने उस दिन की लाज बचाई या उस रात पुहोर सब पर छा गया – इसमें क्या कहना सही होगा यह तो टिमटिमाते सपने पढ़ने पर ही पता चलेगा।

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Description

पुहोर के लिए पूरी दुनिया एक ऐसी प्रयोगशाला थी जहाँ वो करता था अपने अजीबोगरीब प्रयोग! अक्सर उसके कारनामे उसे हेडमास्टर साहब के कमरे तक पहुँचा देते थे, जहाँ उसे शाबाशी नहीं बल्कि चेतावनी मिलती थी। पुहोर की बड़ी बहन उष्मी उसको लेकर बहुत परेशान रहती थी लेकिन उसे यह भी मालूम था कि उसके भाई के विचार कमाल के होते हैं। ये तो बस वक़्त की बात थी और सब ठीक हो जाने वाला था। उसे क्या पता था कि शोणितपुर का विज्ञान मेला दोनों भाई-बहन की ज़िन्दगी बदल देने वाला है! और तो और बॉलीवुड की मशहूर हीरोइन भी उनकी ‘फ़ैन’ बन जाएगी!

इसे English (अँग्रेज़ी) में पढें

Additional information

Weight 70 g
Dimensions 6.75 × 0.5 × 9.5 in
Available Languages

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Number of Pages

24

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